
कटखेत में डॉ. अनामिका शर्मा ने जरूरतमंदों को बांटे कम्बल
टिहरी–उत्तरकाशी की सीमा पर कटखेत गांव में दया का अनमोल दान
जनपद टिहरी और उत्तरकाशी की सीमा से सटा कटखेत गांव, जहां सर्दी पहाड़ों को अपनी गिरफ्त में ले लेती है, वहां मानवता की गर्माहट ने ठिठुरते जीवन को सहारा दिया। कड़ाके की ठंड के बीच एक संवेदनशील, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अनामिका शर्मा अपने दो सहयोगियों के साथ जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आईं।
डॉ. शर्मा ने गांव के बुजुर्गों, बीमारों और निर्धन परिवारों के घर-घर जाकर कम्बल वितरित किए। जब ठंड से कांपते हाथों में कम्बल पहुंचे, तो लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। यह केवल कम्बल नहीं थे, बल्कि करुणा, सुरक्षा और अपनत्व का अहसास था।
महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का कथन है कि जीवन का उद्देश्य केवल जीना नहीं, बल्कि दूसरों की सेवा करते हुए अच्छा जीवन जीना है। डॉ. अनामिका शर्मा का यह छोटा-सा प्रयास उसी विचार को साकार करता है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि एक व्यक्ति का उठाया गया कदम हजारों दिलों को गर्माहट दे सकता है।
सर्दियों में किया गया दान कई बार जीवनरक्षक सिद्ध होता है। यह पहल समाज में आपसी सहयोग और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करती है। ग्राम प्रधान राधा कृष्ण जोशी ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। वहीं, स्थानीय बुजुर्ग महिलाओं ने डॉ. शर्मा की लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन की कामना की।
निस्वार्थ सेवा ही सच्ची सफलता का मार्ग है। कटखेत गांव में दया का यह प्रकाश न केवल इस क्षेत्र को, बल्कि पूरे समाज को रोशन करने की प्रेरणा देता है। हमें भी ऐसे प्रयासों से सीख लेकर जरूरतमंदों के साथ खड़े होने का संकल्प लेना चाहिए।



