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नेहरू पर्वतारोहण संस्थान: भ्रष्टाचार के साये में डूबता राष्ट्रीय गौरव

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान: भ्रष्टाचार के साये में डूबता राष्ट्रीय गौरव

देश के प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) आज गंभीर प्रशासनिक संकट से गुजर रहा है। 29 जुलाई 2025 को संस्थान के कर्मचारियों द्वारा प्रधानाचार्य को सौंपे गए 26 सूत्रीय विस्तृत ज्ञापन ने संस्थान में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और मनमाने प्रशासन की चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक संस्थान प्रमुख द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है।

कर्मचारियों में बंटवारा, कार्यप्रणाली ठप

संस्थान के भीतर कर्मचारी अब दो स्पष्ट गुटों में बंट चुके हैं—केंद्रीय कर्मचारी और सिविल प्रशिक्षक। इस बढ़ती खाई का सीधा असर संस्थान की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। जो प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पहले संयुक्त रूप से संचालित होते थे, अब उन्हें अलग-अलग संचालित करने का निर्णय लिया गया है। यह न केवल संस्थागत अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि NIM की वर्षों से बनी विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

विकास कार्यों में लीपा-पोती, अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में

कर्मचारियों के अनुसार संस्थान में चल रहे विकास कार्यों में सिर्फ दिखावटी सुधार (लीपा-पोती) कर वास्तविक भ्रष्टाचार को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। उच्च अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। शासन के स्पष्ट आदेशों की अनदेखी कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया गया, जिसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

शासन आदेशों की अवहेलना, धन का खुलेआम दुरुपयोग

आरोप है कि संस्थान में उत्तराखंड शासन के आदेशों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। शासनादेश के विपरीत नियुक्त कर्मचारी आज भी संस्थान में कार्यरत हैं और मनमानी सैलरी व आर्थिक लाभ उठा रहे हैं। यह न केवल वित्तीय अनियमितता का मामला है, बल्कि शासन की साख को भी चुनौती देता है।

सरकार की चुप्पी—खतरनाक संकेत

इस पूरे प्रकरण में केंद्र और राज्य सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कोई ठोस हस्तक्षेप न होना यह संकेत देता है कि या तो मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो यह संस्थान अपने अस्तित्व और उद्देश्य दोनों से भटक सकता है।

अब हस्तक्षेप अनिवार्य

यह मामला केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है। यह देश की साहसिक खेल परंपरा, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न है।
केंद्र सरकार और राज्य शासन को तत्काल हस्तक्षेप करते हुए—

कर्मचारियों के 26 सूत्रीय ज्ञापन की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए

भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए

शासन आदेशों का सख्ती से पालन कराना चाहिए

और NIM की कार्यप्रणाली को पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाना चाहिए

यदि अब भी आंखें मूंदी गईं, तो नेहरू पर्वतारोहण संस्थान का गौरव केवल इतिहास बनकर रह जाएगा।

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