
4G मिशन सोसाइटी देहरादून द्वारा एक भव्य विचार संवाद गोष्ठी का आयोजन किया गया

देहरादून। उत्तराखंड के गाँधी कहे जाने वाले अमर बलिदानी रत्न श्री इंद्रमणि बडोनी के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 4G मिशन सोसाइटी देहरादून द्वारा एक भव्य विचार संवाद गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “उत्तराखंड – कल, आज और कल” रहा, जिसमें राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विकासात्मक पक्षों पर गंभीर विमर्श किया गया।
गोष्ठी के अंतर्गत देवी अहिल्याबाई होल्कर के समाज में योगदान तथा नारी सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया, जिसमें महिला सशक्तिकरण, नारी गरिमा और सामाजिक सहभागिता पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में महिलाओं द्वारा पारंपरिक परिधान पहनकर सांस्कृतिक वेश-भूषा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसने उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। प्रतिभागी महिलाओं की वेश-भूषा, लोक आभूषण और पारंपरिक अंदाज ने सभी उपस्थितजनों का मन मोह लिया।
यह आयोजन 25 दिसंबर को भारत रत्न श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित गोष्ठी एवं संवाद समारोह के रूप में भी विशेष महत्व रखता था। कार्यक्रम में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना एवं सेवा भाव पर केंद्रित विचार प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर 4G मिशन सोसाइटी देहरादून द्वारा जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी के प्रमुख अधीक्षक डॉ. प्रेम सिंह पोखरियाल को उनके उत्कृष्ट प्रशासनिक कार्य, जनसेवा के प्रति समर्पण तथा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. पोखरियाल का कार्य स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता, अनुशासन और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे आमजन को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
सम्मान ग्रहण करते हुए डॉ. प्रेम सिंह पोखरियाल ने आयोजकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सम्मान उन्हें और अधिक निष्ठा के साथ जनसेवा के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से सकारात्मक सहयोग की अपील की।
कार्यक्रम में समाजसेवी, शिक्षाविद, महिलाएं, युवा वर्ग एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगकर्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। यह आयोजन न केवल विचार-विमर्श का मंच बना, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, नारी सम्मान और सेवा भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करने में सफल रहा।



