उत्तरकाशी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे राशन विक्रेताओं ने सरकार से अन्य राज्यों की तर्ज पर नियमित मानदेय निर्धारित करने की मांग की है। राशन विक्रेता संगठन का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद विक्रेताओं को मिलने वाले लाभांश में कमी आई है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो रही है।
संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, राशन विक्रेता लंबे समय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद वर्तमान लाभांश से परिवार का भरण-पोषण करने के साथ दुकान का किराया, स्टेशनरी, इंटरनेट, बिजली और अन्य जरूरी खर्चों का वहन करना मुश्किल हो रहा है।

राशन विक्रेताओं का कहना है कि डिजिटल प्रणाली के तहत काम का स्वरूप लगातार बदल रहा है और कई स्तरों पर तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता बढ़ी है। ऐसे में मौजूदा लाभांश उनके खर्चों की तुलना में पर्याप्त नहीं है। संगठन लंबे समय से सरकार के समक्ष मानदेय की मांग रखता आ रहा है।
प्रदेश राशन विक्रेता संगठन ने सरकार से राज्य के सभी जिलों में कार्यरत राशन विक्रेताओं के लिए उचित और नियमित मानदेय निर्धारित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आर्थिक रूप से मजबूत होने पर राशन विक्रेता सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी और सुचारु तरीके से संचालित कर सकेंगे।



