कैंची धाम की बढ़ती भीड़ से हल्द्वानी-काठगोदाम में जाम, पहाड़ के सफर पर भारी पड़ रही अव्यवस्था

Barsali Times Desl
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हल्द्वानी। बाबा नीम करौली महाराज का कैंची धाम देश-दुनिया के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। छुट्टियों और सप्ताहांत में यहां उमड़ने वाली भारी भीड़ अब हल्द्वानी और काठगोदाम की यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। कैंची धाम की ओर जाने वाले वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण कई बार हल्द्वानी-काठगोदाम मार्ग पर लंबा जाम लग जाता है। इसका असर स्थानीय लोगों के साथ-साथ कुमाऊं के पर्वतीय जिलों की ओर जाने वाले यात्रियों पर भी पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में शाम के समय स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है। बाजार और कामकाज से लौटने वाले लोगों को घर पहुंचने में घंटों लग रहे हैं। स्कूली बच्चों, कर्मचारियों, बुजुर्गों और मरीजों को भी जाम की परेशानी झेलनी पड़ रही है।

घर लौटना भी हो रहा मुश्किल

काठगोदाम, रानीबाग और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए हल्द्वानी से घर लौटना कई बार मुश्किल हो जाता है। स्थानीय वाहन चालकों के अनुसार, शीशमहल से आगे यातायात का दबाव इतना बढ़ जाता है कि वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो जाती है। कई टेंपो और थ्री-व्हीलर चालक भी जाम वाले हिस्सों में यात्रियों को आगे ले जाने से बचते हैं।

जाम का असर केवल स्थानीय यातायात तक सीमित नहीं रहता। राष्ट्रीय राजमार्ग-109 पर यातायात प्रभावित होने से अल्मोड़ा, रानीखेत, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और बेरीनाग समेत पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।

एंबुलेंस और मरीजों की चिंता

सबसे गंभीर चिंता आपातकालीन सेवाओं को लेकर जताई जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों से गंभीर मरीजों को हल्द्वानी के अस्पतालों तक लाने वाली एंबुलेंस भी कई बार यातायात के दबाव में फंस जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में कुछ घंटों में पूरा होने वाला सफर जाम के कारण काफी लंबा हो जाता है।

उनका कहना है कि यातायात व्यवस्था में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे आपातकालीन वाहनों को निर्बाध रास्ता मिल सके और स्थानीय लोगों की आवाजाही भी प्रभावित न हो।

आस्था के साथ यातायात अनुशासन की जरूरत

कैंची धाम में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बीच स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक पर्यटन और यातायात व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। भीड़ बढ़ने के दौरान सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग और लेन अनुशासन की अनदेखी से समस्या और बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, बाबा नीम करौली महाराज की शिक्षाओं में सेवा, संयम और परोपकार को विशेष महत्व दिया गया है। ऐसे में श्रद्धालुओं से भी यातायात नियमों का पालन करने और स्थानीय लोगों की सुविधा का ध्यान रखने की अपील की जा रही है।

स्थायी यातायात व्यवस्था की मांग

हर सप्ताह सामने आ रही यातायात समस्या को देखते हुए स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल जाम के समय पुलिसकर्मियों की तैनाती से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। कैंची धाम जाने वाले वाहनों के लिए पार्किंग, शटल सेवा, यातायात डायवर्जन और संवेदनशील मार्गों पर वाहन संख्या के नियमन जैसी व्यवस्थाओं पर दीर्घकालिक योजना बनाने की जरूरत है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए यातायात प्रबंधन की ठोस व्यवस्था होनी चाहिए। इससे श्रद्धालुओं को भी सुगम दर्शन का अवसर मिलेगा और कुमाऊं के लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही भी बाधित नहीं होगी।

प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता के बीच प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और स्थानीय जनजीवन के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। लोगों का कहना है कि समय रहते प्रभावी यातायात योजना लागू नहीं की गई तो छुट्टियों और सप्ताहांत में जाम की समस्या और बढ़ सकती है।

अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ हल्द्वानी-काठगोदाम और पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखने के लिए क्या स्थायी कदम उठाता है।

 

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