भटवाड़ी में प्रधान संगठन ने उठाई मानदेय बढ़ाने, ग्राम प्रधान निधि बनाने और मनरेगा की उपस्थिति ऑफलाइन करने की मांग; शासन से समाधान की मांग
भटवाड़ी/उत्तरकाशी। विकासखंड भटवाड़ी में आयोजित क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) की बैठक में ग्राम प्रधानों ने अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। ग्राम प्रधानों की अनुपस्थिति के चलते बैठक में निर्धारित कोरम पूरा नहीं हो सका, जिसके बाद ब्लॉक प्रमुख ममता पंवार को बैठक स्थगित करनी पड़ी।
ग्राम प्रधान संगठन ने अपनी मांगों के समर्थन में दस सूत्रीय मांगपत्र भी प्रस्तुत किया। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक ग्राम प्रधान बीडीसी बैठकों में प्रतिभाग नहीं करेंगे। प्रधानों का कहना है कि उनकी मांगें केवल मानदेय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्राम पंचायतों को अधिकार संपन्न बनाने और पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विकास कार्यों को गति देने से जुड़ी हैं।

मानदेय से लेकर ग्राम प्रधान निधि तक की मांग
ग्राम प्रधान संगठन की प्रमुख मांगों में ग्राम प्रधानों को न्यूनतम 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने के साथ ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्यों को बैठकों में प्रतिभाग करने पर मानदेय देने की मांग शामिल है। इसके अलावा मनरेगा एवं वीबी-जी रामजी योजना में श्रमिकों की उपस्थिति की प्रक्रिया पूरी तरह ऑफलाइन करने की मांग उठाई गई है। प्रधानों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में कठिनाइयां आती हैं।
संगठन ने राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त से ग्राम पंचायतों को मिलने वाली धनराशि जनसंख्या एवं भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर बढ़ाने, जिला योजना में ग्राम पंचायतों के विकास प्रस्ताव खुली बैठक में पारित कराने और जिला योजना की बैठकों में प्रधान संगठन को नामित सदस्य के रूप में शामिल करने की मांग भी रखी।
ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार देने की मांग
प्रधान संगठन ने पंचायतीराज अधिनियम में शामिल सभी 29 विभागों को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग की है। साथ ही विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि की व्यवस्था करने की मांग उठाई, ताकि आपदा, आगजनी और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल राहत कार्य कराए जा सकें।
इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायतों में विभिन्न विभागों की ओर से स्वीकृत 10 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत को बनाने, ग्राम प्रधानों एवं उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा की सुविधा देने तथा प्रधानमंत्री आवास प्लस सर्वे-2024 में पात्र होने के बावजूद सूची से छूटे लाभार्थियों के नाम संशोधन के बाद शामिल करने की मांग की गई।
संगठन ने 16वें वित्त आयोग की नई गाइडलाइन के तहत ग्राम पंचायतों पर लगाए जा रहे अनिवार्य टैक्स के आदेश में संशोधन कर पंचायतों को इससे मुक्त रखने की मांग भी उठाई।
पर्वतीय क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुरूप हो नियम
ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष एवं हूर्री के ग्राम प्रधान रमेश नेगी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से बिल्कुल अलग हैं। यहां गांवों तक निर्माण सामग्री पहुंचाना चुनौतीपूर्ण और खर्चीला होता है। ऐसे में जी राम जी योजना के तहत 60:40 के मजदूरी एवं सामग्री अनुपात में राहत देने की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित न हों।
उन्होंने कहा कि प्रधान संगठन की मांगें ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाने, ग्रामीण विकास को गति देने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप योजनाओं के संचालन से जुड़ी हैं।
बीडीसी बैठक स्थगित होने के बाद अब सभी की निगाहें शासन-प्रशासन और पंचायतीराज विभाग पर टिकी हैं कि प्रधान संगठन की मांगों के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
इस दौरान ग्राम प्रधान विवेक नौटियाल, अंतर रमोला, अभिषेक रौतेला, सुनील रौतेला, दीपा रावत, मीनाक्षी देवी, सुनीता देवी, बुद्धि आर्य, अवतार सिंह पंवार समेत दर्जनों ग्राम प्रधान मौजूद रहे।
रिपोर्ट: रविन्द्र सिंह रावत








