अनुराग नौटियाल और अरविंद चौहान ने डिजिटल माध्यमों से लोकभाषा, लोकगीत और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर दिया जोर
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी “डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति एवं पॉप कल्चर” में उत्तरकाशी के युवा लोक कलाकारों ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को लेकर अपने विचार साझा किए।
संगोष्ठी में जनपद उत्तरकाशी के युवा लोकगायक अनुराग नौटियाल और अरविंद चौहान ने प्रतिभाग किया। अनुराग नौटियाल ने मुख्य वक्ता के रूप में लोकभाषा, लोकगीत, लोकसंगीत और लोकपरंपराओं को डिजिटल माध्यमों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग कर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है। डिजिटल माध्यम लोकसंस्कृति को व्यापक मंच देने के साथ युवाओं को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण जरिया बन सकते हैं।
वहीं युवा लोकगायक अरविंद चौहान ने भी उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और लोकसंगीत के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। राष्ट्रीय स्तर के मंच पर दोनों युवा कलाकारों की सहभागिता को उत्तरकाशी के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।
अनुराग नौटियाल सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान युवा लोकगायक अनुराग नौटियाल को सम्मानित भी किया गया। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. कपिल पंवार का धन्यवाद किया, जिन्होंने उन्हें राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में विचार रखने का अवसर दिया।
युवा कलाकारों की यह पहल उत्तरकाशी की लोकभाषा, लोकधुनों और सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक डिजिटल मंचों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



