नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में मूल काश्तकारों के साथ अन्याय

Barsali Times Desl
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नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में मूल काश्तकारों के साथ अन्याय

आरोप, बिना विज्ञप्ति के नियुक्ति और स्थानीय लोगों का उत्पीड़न

जमीन का कब्जा और संसाधनों से वंचित करना

ग्रामीण कर रहे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष

उत्तरकाशी। जनपद उत्तरकाशी में माननीय राज्यमंत्री प्रताप पंवार ने कोटि कोटियाल गांव की ग्रामीण महिलाओं के साथ जिलाधिकारी से विस्तारित वार्ता करते हुए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी में कई सालों से मूल काश्तकार ईमानदारी से अपनी सेवा दे रहे थे जिनको संस्थान में बैठे उच्च अधिकारियों ने अपने व्यक्तिगत हित के कारण झूठे आरोप लगाकर मूल काश्तकारों की दो माह पहले ही सेवा समाप्त कर दी।

केंद्र सरकार, शासन, प्रशासन को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया गया लेकिन आज तक कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई। जिसको लेकर आज जिलाधिकारी के साथ माननीय मंत्री और महिलाओं वार्ता की गई ।

आपको बता दें कुछ लोगों को 2015 से 2018 के बीच बिना विज्ञप्ति के बैंक डोर से नियमित नियुक्ति दी गई।

इसी प्रकार 2018 से 2023 में फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपने चहेतों को बिना किसी विज्ञप्ति के संविदा में शामिल कर दिया गया और स्थानीय मूल के लोगों को दैनिक मजदूरी में दिखाया गया।

वहीं संस्थान कई वर्षों से सेवा दे रहे काश्तकारों को बिना कारण के संस्थान बाहर निकाल रहा है ताकि इन्हें नियमित नियुक्ति से कुछ काश्तकारों को वंचित रखा जाय।

 

जब संस्थान की स्थापना हुई तो उस समय शासन द्वारा शासन आदेश जारी किए गए हैं कि जिन काश्तकारों की भूमि सरकारी हित्तों के लिए अर्जित की जा रही है। उन परिवारों के या गांव से गरीब परिवार के एक-एक व्यक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन संस्थान ग्रामीणों के साथ अन्यापूर्ण व्यवहार कर रहा है। संस्थान द्वारा कुछ भूमि काश्तकारों की ले रखी है। और कुछ भूमि ऐन-कैन तरीके से वन विभाग की कब्जा रखी है।

 जब ग्रामीण महिलाएं घास लकड़ी लेने जाते है, तो उनको जंगल में जाने से रोक दिया जाता है  इसी भूमि पर संस्थान घास की नीलामी करवाता है। और हजारों रुपया अर्जित करता है। काश्तकारों को लकड़ी और घास से वंचित रखा जाता है। कोटी कोटियाल के समस्त ग्रामवासी यह चाहते हैं कि जो भूमि संस्थान को काश्तकारों द्वारा कौडियों के भाव से दी गई थी। शासन द्वारा उसका मुआवजा संस्थान ने काश्तकारों को औने पौने दाम देकर संस्थान द्वारा कब्जा कर लिया था। उसका मुआवजा काश्तकार वापस देने को तैयार है। क्योंकि हमारे पास आए दिन रोजगार का कोई स्रोत नहीं है। यहां तक कि मूल काश्तकारों को बिजली पानी से संस्थान द्वारा वंचित रखा जा रहा है। इसलिए समस्त काश्तकार अपनी जमीन को पुनः अपने कब्जे में लेना चाहते है।

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