मां गंगा दशहरा पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया, हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था विश्वास की डुबकी लगाई पुण्य अर्चित किया
आज गंगोत्री धाम में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। गंगा दशहरा महापर्व पर गंगोत्री धाम में हजारों की संख्या में देश विदेशों के श्रद्धालुओं ने इस महा पर्व पर आस्था विश्वास की गंगा स्नान घाट पर डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। वहीं जनपद
मुख्यालय के मणिकर्णिका घाट सहित विभिन्न घाटों और कस्बों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु मां गंगा की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
गंगोत्री धाम में गंगा दशहरा पर्व पर पांच मंदिर समित ने श्रद्धालुओं के आस्था के लिए विशेष आयोजन किया हुआ है , श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। इस पावन पर्व का श्रद्धालु पूरे वर्ष बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और गंगा आरती का आयोजन भी किया जा रहा है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
आज मां गंगा दशहरा के महा पर्व पर मां गंगा मंदिर से राजा भागीरथ महाराज के जय जय कारों के साथ स्नान घाट पर पूजा अर्चना सहस्त्रनाम पाठ पूजा अर्चना की गई जिसके साक्षी हजारों श्रद्धालुओं बने

पांच मंदिर समित सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि गंगोत्री धाम में गंगा दशहरा पर्व पर देश विदेशों के श्रद्धालुओं एकत्रित हुए आज राजा भागीरथ महाराज को पालकी में बिठा कर स्नान घाट पर विशेष पूजा अर्चना सहस्त्रनाम पाठ आदि किया गया आज के दिन जो भी श्रद्धालु मां गंगा में आस्था की डुबकी लगता है उसके दस पाप धुल जाते है । हजारों श्रद्धालु इस पुण्य के साक्षी बने ,
बाइट .. श्रद्धालु गंगोत्री धाम , ने बताया कि गंगा दशहरा पर्व पर में देहरादून से आज हूं आज का दिन बाद महत्व पूर्ण माना जाता है , इस दिन स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है ।
बाइट , रावल रविन्द्र सेमवाल ने बताया कि आज के दिन राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार और मानव कल्याण के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हुईं, लेकिन उनके तेज प्रवाह को संभालना संभव नहीं था। तब भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण किया और धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसके बाद मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं और लोगों के पापों का नाश करते हुए जीवनदायिनी बनीं। इसी कारण गंगा को “भागीरथी” भी कहा जाता है।
गँगा सप्तमी — पौराणिक शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा जी ने स्वर्ग लोक से पृथ्वी लोक पर आई , शिवशंकर जी ने माँ गंगा जी को अपनी जटाओं में थाम लिया।।
इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है।।
ऐसी मान्यता है कि माँ गंगा जी लगभग 32 दिनों तक शिव जी की जटाओं में विचरण करती रहीं, बहती रही, घूमती रही है।और फिर, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भगवान शिव ने अपनी एक जटा खोली और गंगा माँ धरती पर अवतरित हुईं।।
जिस दिन माँ गंगा जी शिव की जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित हुई वह दिन ‘गंगा दशहरा’ (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है।।



