उत्तरकाशी।
उत्तरकाशी जनपद में कृषि को अधिक आत्मनिर्भर, उन्नत और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए कृषि विभाग ने ‘आत्मा योजना’ के तहत 40 प्रगतिशील किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विशेष प्रशिक्षण के लिए देहरादून रवाना किया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने हरी झंडी दिखाकर किसानों के दल को उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद भेजा, जहां उन्हें तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस प्रशिक्षण में भटवाड़ी, डुंडा और चिन्यालीसौड़ विकासखंडों के किसान भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों और वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देकर जिले में टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि को बढ़ावा देना है।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि जनपद में जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं। किसानों को प्रशिक्षण के माध्यम से आधुनिक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे खेती को अधिक लाभकारी और गुणवत्तापूर्ण बना सकें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित किसान अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा करेंगे, जिससे पूरे जिले में जैविक खेती को नई दिशा मिलेगी।
प्रशिक्षण में शामिल कृषक संता राणा (ग्राम डीडसारी) ने बताया कि वे लंबे समय से जैविक खेती कर रहे हैं, लेकिन इस प्रशिक्षण से नई तकनीकों की जानकारी मिलेगी, जिससे खेती को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
कृषि सखी विषमला राणा ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सब्जियों की गुणवत्ता बढ़ाने, उत्पादन में सुधार और प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी जाएगी, जिसका लाभ किसानों को सीधे मिलेगा।
वहीं, चिन्यालीसौड़ के ग्राम कामदा निवासी कृषक जय सिंह बिष्ट ने कहा कि आत्मा योजना के तहत मिले इस अवसर से किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों का ज्ञान मिलेगा, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
कृषि विभाग का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



