यह मामला वित्तीय वर्ष 2026-27 का है। सहायक विकास अधिकारी पंचायत, लक्सर की ओर से सात सितंबर को जिला पंचायत राज अधिकारी को भेजी गई संस्तुति रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि संबंधित अधिकारी ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायत विकास योजना को पंचायतीराज मंत्रालय, भारत सरकार के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। इसके बावजूद चार ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त आयोग से आवंटित अनुदान की पहली किस्त की धनराशि निकाल ली गई।
चार ग्राम पंचायतों से निकाली गई रकम
सहायक विकास अधिकारी पंचायत की रिपोर्ट के अनुसार, लक्सर ब्लॉक की चार ग्राम पंचायतों में कुल 26.06 लाख रुपये की निकासी की गई। इनमें अकबरपुर ऊद, दरगाहपुर, मुंडाखेड़ा कलां और नेतवाला सैदाबाद शामिल हैं।
रिपोर्ट में ग्राम पंचायतवार निकाली गई धनराशि का विवरण इस प्रकार दिया गया है:
- अकबरपुर ऊद: 6.66 लाख रुपये
- दरगाहपुर: 9.45 लाख रुपये
- मुंडाखेड़ा कलां: 9.44 लाख रुपये
- नेतवाला सैदाबाद: 51 हजार रुपये
चारों ग्राम पंचायतों से निकाली गई कुल धनराशि 26.06 लाख रुपये बताई गई है। रिपोर्ट में इस निकासी को निर्धारित नियमों के विपरीत बताते हुए वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।
नोटिस के बावजूद नहीं दिया स्पष्टीकरण
संस्तुति रिपोर्ट के मुताबिक, सहायक विकास अधिकारी पंचायत की ओर से 22 अगस्त 2026 को ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सुशील सती को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि, निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिस का जवाब नहीं दिया गया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अन्य मामलों में उच्चाधिकारियों की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने की शिकायतें भी सामने आई थीं। इसे अनुशासनहीनता और उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना के रूप में देखा गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह ने सुशील सती को निलंबित करने के आदेश जारी किए। साथ ही, प्रशासनिक कार्रवाई के तहत उन्हें लक्सर ब्लॉक से हटाकर बहादराबाद ब्लॉक मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद पंचायतों में सरकारी अनुदान के इस्तेमाल और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन को लेकर सवाल उठे हैं। संबंधित रिपोर्ट में धनराशि की निकासी को नियमों के विपरीत बताया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित अभिलेखों और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर की जाएगी।








