पौड़ी गढ़वाल। गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड (जीएमओयू) में कथित वित्तीय अनियमितताओं का एक और मामला सामने आया है। कंपनी प्रबंधन की आंतरिक जांच में वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान करीब 1.81 करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आने का दावा किया गया है। आरोप है कि फर्जी प्रार्थना पत्रों, वाउचरों, वाहन स्वामियों के नाम पर तैयार दस्तावेजों और काल्पनिक खर्चों के आधार पर कंपनी की धनराशि का भुगतान दर्शाया गया। मामले में कंपनी प्रबंधन ने पुलिस उपाधीक्षक को तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जीएमओयू के संयुक्त सचिव नितिन रावत की ओर से दी गई शिकायत में वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में संबंधित पदाधिकारियों, अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
जांच रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेजों से भुगतान का आरोप
शिकायत के अनुसार, कोटद्वार स्थित कंपनी मुख्यालय में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और वाउचरों के माध्यम से भुगतान दर्शाकर कंपनी की धनराशि निकाली गई। कंपनी की जांच समिति की 17 सितंबर 2026 को तैयार रिपोर्ट और विशेष मुख्य लेखा अधिकारी की 6 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में भी वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख होने की बात कही गई है।
आरोप है कि कुछ पदाधिकारियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से फर्जी नामों, वाहन स्वामियों के नाम पर तैयार कागजात और काल्पनिक खर्चों के आधार पर भुगतान दर्ज किए। शिकायत में पूर्व चेयरमैन, तत्कालीन महाप्रबंधक, सहायक लेखाधिकारी, लेखा लिपिक, कैशियर और स्टेशन इंचार्ज की भूमिका की भी जांच करने की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय हो सकेगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं अनियमितता के मामले
जीएमओयू में मार्च 2025 में भी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। इसके अलावा, कंपनी की जमीन को खुर्द-बुर्द किए जाने के आरोपों को लेकर भी कार्रवाई की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्षेत्राधिकारी की जांच के बाद इस संबंध में कोतवाली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद कंपनी के वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों से जुड़े प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
3.85 करोड़ रुपये के कथित गबन का भी उल्लेख
शिकायत में वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान करीब 3.85 करोड़ रुपये के कथित गबन का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह राशि 2022-23 में बताई गई 1.81 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता से अलग है या इसमें शामिल है। धनराशि का वास्तविक हिसाब, कथित नुकसान की कुल रकम और जिम्मेदार लोगों की भूमिका विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल कंपनी प्रबंधन ने पुलिस से मामले की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। आरोपों की पुष्टि और पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।








