उत्तरकाशी। जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और बोल्डर गिरने का खतरा बढ़ गया है। मंगलवार को मनेरा बाईपास पर पहाड़ी से अचानक गिरे मलबे और बड़े बोल्डरों की चपेट में आने से एक कार सड़क से नीचे खाई में जा गिरी। हालांकि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, क्योंकि कार चालक खतरा भांपकर समय रहते वाहन से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया था।
मनेरा बाईपास पर पिछले कई दिनों से पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को अचानक भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर सड़क पर आ गिरे। इसी दौरान वहां खड़ी कार भी इसकी चपेट में आ गई और अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पहाड़ी से तेजी से मलबा और बोल्डर गिरते दिखाई दे रहे हैं।
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हादसे के बाद मनेरा बाईपास से गुजरने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान इस मार्ग पर भूस्खलन का खतरा लगातार बना रहता है। लोगों ने संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कराने, सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाने और खतरे वाले हिस्सों में यातायात को नियंत्रित करने की मांग की है।
एक साल से अधूरा पड़ा मोटर पुल
उधर, यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के नौगांव विकासखंड में कुपड़ा-कुंशाला-त्रिखीली मोटर मार्ग पर गड़गाड़ में निर्माणाधीन मोटर पुल भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार पुल का निर्माण शुरू हुए करीब एक साल बीत चुका है, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो पाया है। सड़क की हालत भी खराब होने के कारण ग्रामीणों को अस्थायी रास्तों से आवाजाही करनी पड़ रही है।
स्थानीय निवासी महावीर पंवार माही ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र का विधायक और मुख्यमंत्री भी मौके का निरीक्षण कर चुके हैं। निरीक्षण के बाद ग्रामीणों को पुल और सड़क का काम जल्द पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन लंबे समय बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
पुल अधूरा होने के कारण स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में अस्थायी रास्तों से आवाजाही करना जोखिम भरा हो गया है।
ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग से मोटर पुल का निर्माण जल्द पूरा कराने और सड़क को दुरुस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। एक तरफ बारिश और भूस्खलन ने जिले में आवाजाही को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, वहीं दूसरी ओर अधूरे निर्माण कार्यों ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।


