CM धामी के बयान का मुस्लिम संगठनों ने किया समर्थन, बोले- मस्जिदों के अंदर ही हो इबादत

Barsali Times Desl
4 Min Read

देहरादून।

उत्तराखंड में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हालिया बयान के बाद प्रदेश में सियासी और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब मुस्लिम समुदाय और प्रमुख धार्मिक संगठनों की राय भी खुलकर सामने आ गई है।

खास बात यह है कि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड और जमीअत उलेमा-ए-हिंद जैसी बड़ी संस्थाओं ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए साफ किया है कि सड़कों के बजाय मस्जिदों और ईदगाहों के अंदर ही नमाज अदा की जानी चाहिए।

‘दूसरों को तकलीफ देना इस्लाम की भावना के खिलाफ’

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने मुख्यमंत्री के बयान का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने इस मुद्दे को धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से समझाते हुए कहा:

हक उल इबाद: इस्लाम में इबादत के नियम (हक उल इबाद) कहते हैं कि आपकी इबादत से किसी दूसरे को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

ट्रैफिक और एंबुलेंस की समस्या: जुम्मे या ईद की नमाज के दौरान सड़कों पर बैठने से ट्रैफिक जाम होता है और एंबुलेंस फंस जाती हैं, जो सही नहीं है।

साफ-सफाई का महत्व: सड़क कोई स्वच्छ स्थान नहीं है, वहां धूल-मिट्टी और गंदगी होती है। ऐसी जगह पर नमाज पढ़ना इस्लाम की भावना के अनुरूप नहीं है।

दो पालियों (Shifts) में नमाज का सुझाव: शादाब शम्स ने बताया कि भीड़ अधिक होने पर टकराव या विवाद की जरूरत नहीं है। उलेमाओं द्वारा पहले ही फतवा जारी किया जा चुका है कि ईद या जुम्मे की नमाज दो अलग-अलग शिफ्ट में भी पढ़ी जा सकती है।

जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने भी की अपील

जमीअत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश मीडिया प्रभारी मोहम्मद शाह नजर ने भी कहा कि संगठन का स्टैंड हमेशा से साफ रहा है कि नमाज मस्जिदों और ईदगाहों के अंदर ही होनी चाहिए। पूरे उत्तराखंड में केवल एक-दो जगह ही ऐसी हैं जहां जगह की कमी है, लेकिन वहां भी प्रशासन के साथ मिलकर बेहतर व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने इस मुद्दे पर बेवजह विवाद न खड़ा करने की अपील की।

बकरीद को लेकर जमीअत उलेमा की गाइडलाइन और बड़ी अपील

आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) को देखते हुए देहरादून के आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा दार-ए-अरकम में जमीअत उलेमा की एक अहम बैठक हुई, जिसमें समाज के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए:

सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी से बचें: कुर्बानी केवल निर्धारित और वैध स्थानों पर ही की जाए। सड़क, गली या चौराहों पर ऐसा करने से बचें ताकि सामाजिक सौहार्द न बिगड़े।

सोशल मीडिया पर नो फोटो-वीडियो: सोशल मीडिया पर कुर्बानी की तस्वीरें या वीडियो शेयर न करें। ऐसी तस्वीरों से समाज में गलत संदेश जाता है और विवाद की स्थिति बनती है।

अफवाहों से रहें दूर: किसी भी प्रकार की भड़काऊ बातों या अफवाहों पर ध्यान न दें और कोई भी समस्या होने पर तुरंत पुलिस और प्रशासन से संपर्क करें।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मुहिम का समर्थन

इस बैठक में एक और बड़ा फैसला लिया गया। जमीअत उलेमा के पदाधिकारियों ने घोषणा की कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिलाने के समर्थन में उत्तराखंड के अंदर भी एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। संगठन ने कहा कि समाज में शांति, सद्भाव और आपसी सम्मान बनाए रखना सभी नागरिकों की साझी जिम्मेदारी है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *