उत्तरकाशी की उपेक्षा और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की जिम्मेदारी…..
उत्तरकाशी की उपेक्षा और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की जिम्मेदारी.....

उत्तरकाशी की उपेक्षा और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की जिम्मेदारी…..
हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के जनपद उत्तरकाशी को साहसिक खेलों और पर्वतारोहण की दृष्टि से देश-दुनिया में एक विशेष पहचान प्राप्त है। यही कारण है कि यहां स्थापित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान वर्षों से पर्वतारोहण, साहसिक खेलों और युवाओं के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। लेकिन हाल के समय में प्रशासनिक फेरबदल और नीतिगत अस्पष्टता के चलते यह संस्थान अपने मूल उद्देश्य से भटकता हुआ दिखाई दे रहा है।
दरअसल, जिस संस्थान की स्थापना साहसिक खेलों को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं को अवसर देने के लिए की गई थी, वहीं अब कई प्रस्तावित खेल आयोजनों को जनपद से बाहर अन्य मंडलों में आयोजित करने की प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। इससे न केवल उत्तरकाशी के स्थानीय खिलाड़ियों और युवाओं के अवसर कम हो रहे हैं, बल्कि जनपद की उपेक्षा भी साफ दिखाई देती है।
चिंता की बात यह भी है कि संस्थान द्वारा उपलब्ध संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता के साथ होता नहीं दिख रहा। पैरा ग्लाइडिंग जैसे आयोजनों का हवाला देकर बजट व्यय किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि उत्तरकाशी में ही पैरा ग्लाइडिंग के लिए कई उपयुक्त और संभावनाओं से भरे स्थान मौजूद हैं। इसके बावजूद इन स्थानों का समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा और अन्य क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित कर शासन को भ्रमित करने की आशंका भी उठ रही है।
उत्तरकाशी जैसे पर्वतीय जनपद में साहसिक खेलों की अपार संभावनाएं हैं। यदि यहां योजनाबद्ध तरीके से पर्वतारोहण, ट्रेकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग और पैरा ग्लाइडिंग जैसे खेलों को बढ़ावा दिया जाए, तो इससे न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी। साथ ही यह क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहसिक खेलों का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
ऐसे में आवश्यक है कि शासन और संबंधित विभाग इस विषय को गंभीरता से लें और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप कार्य करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दें। जनपद उत्तरकाशी में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों और संभावनाओं का उपयोग यहीं के विकास के लिए किया जाना चाहिए, न कि उन्हें नजरअंदाज कर अन्य स्थानों पर संसाधनों का उपयोग किया जाए।
यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह केवल एक संस्थान की कार्यप्रणाली का प्रश्न नहीं रहेगा, बल्कि उत्तरकाशी जैसे महत्वपूर्ण जनपद की संभावनाओं और युवाओं के भविष्य से भी जुड़ा मुद्दा बन जाएगा। इसलिए पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थानीय विकास को प्राथमिकता देना आज समय की मांग है।



